हिज्र – एक कविता

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हिज्र - एक कविता

हिज्र – एक कविता। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन

तुम्हें याद है

उस रात

हिज्र की सुबह

आते-आते

आधा चाँद

तुम साथ ले गए थे

आधा चाँद

मेरे पास रह गया था।

और बिछड़ते वक़्त

हम दोनों जान गए थे

अब चाँद कभी पूरा न होगा

कभी पूरा न होगा।

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