Gay

Masked Man at Pride

कविता : मुझको मुझसे मिलने दो

एक अरसा हुआ अब तो मुझको मुझसे मिल लेने दोइस समाज और इस सोच से अब तो कुछ पल चैन की मुझको भी जी लेने दो। कैसे समझाऊँ कि कितना तड़प रहा हूँ? इस झूठी पहचान को ख... Read More...
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Poem: Happily Gay

I'm born this way & I'mhappily grateful & beautiful all my ways. I'm not gonna wait for any society, any strangers, any government to decide my righ... Read More...

कैंसर

पापा को कैंसर था। उनके बाद गुज़रा हुआ वक़्त, अब उनके साथ गुज़ारे हुए वक़्त से ज़्यादा हो गया है। वो क्या थे? वो कैसे बात करते थे? मैं कुछ पक्के तौर पर नहीं कह सकत... Read More...