Gay

Masked Man at Pride

कविता : मुझको मुझसे मिलने दो

एक अरसा हुआ अब तो मुझको मुझसे मिल लेने दोइस समाज और इस सोच से अब तो कुछ पल चैन की मुझको भी जी लेने दो। कैसे समझाऊँ कि कितना तड़प रहा हूँ? इस झूठी पहचान को ख... Read More...
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Poem: Happily Gay

I'm born this way & I'mhappily grateful & beautiful all my ways. I'm not gonna wait for any society, any strangers, any government to decide my righ... Read More...

कैंसर

पापा को कैंसर था। उनके बाद गुज़रा हुआ वक़्त, अब उनके साथ गुज़ारे हुए वक़्त से ज़्यादा हो गया है। वो क्या थे? वो कैसे बात करते थे? मैं कुछ पक्के तौर पर नहीं कह सकत... Read More...

वो आख़िरी मुलाकात…

नमन ने कपड़े पहने और जाने के लिए तैयार हो गया। जैसे ही वह दरवाजे से बाहर निकला, मैने उसे आखिरी बार देखा और उसे एक मुस्कान दी। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, मैं ज़ोर ... Read More...
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Poem: Judgemental Queers

“No fat, no femme, no slim, not them.”I cringed at the words, my eyes bled. I flinched a little as I furthermore read..“Not above thirty, not below nineteen,No... Read More...

4 साल के रिश्ते में आयी दूरियों को हमने कुछ ऐसे मिटाया…

यह दूसरी बार था, जब मैंने उसे ग्राइंडर पर पकड़ा था। अभी उसे बताना नहीं चाह रहा था क्योंकि उसकी परीक्षा चल रही है। इंतज़ार कर रहा था कि कब उसकी परीक्षा ख़त्म हो और... Read More...