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Poem: Happily Gay

I'm born this way & I'mhappily grateful & beautiful all my ways. I'm not gonna wait for any society, any strangers, any government to decide my righ... Read More...

कविता : गुड़िया

गुड़ियाएं मेरे हर राज़ की राज़दार थीकपड़े से बनी, मोटी आँखों वालीअनगढ़ अंगों वाली और हमेशा हँसने वालीजब से बड़ा हुआ, मैंने हर अपना दुख कह दिया इनसेअपनी हर खुशी ब... Read More...

कैंसर

पापा को कैंसर था। उनके बाद गुज़रा हुआ वक़्त, अब उनके साथ गुज़ारे हुए वक़्त से ज़्यादा हो गया है। वो क्या थे? वो कैसे बात करते थे? मैं कुछ पक्के तौर पर नहीं कह सकत... Read More...

वो आख़िरी मुलाकात…

नमन ने कपड़े पहने और जाने के लिए तैयार हो गया। जैसे ही वह दरवाजे से बाहर निकला, मैने उसे आखिरी बार देखा और उसे एक मुस्कान दी। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, मैं ज़ोर ... Read More...

बचपन मे हुए यौन शोषण के ज़ख्म…

बात  उस  समय की है जब में नौ साल का था। जहाँ बचपन से ही हमेशा मेरे साथ के सारे दोस्त व भाई क्रिकेट व फुटबॉल खेलने के लिए हमेशा तैयार रहते थे वहीँ मेर... Read More...