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Hindi

कविता – इश्क़ के इम्तेहान

By Amit Rai

January 15, 2021

बड़ी मुद्दत हुई तेरी महफिल से रुसवा हुएज़ख्म पर ये आज सा लगता हैवैसे तो तनहा पहले भी हुए मगरपर अब ये सुनापन आग सा लगता है।यादों की तर्कश में कांटे थे कभीपर इस बार जज़्बा ये खास लगता हैउनकी आहट रोज़ सूनते थे कभीपर अब ये खमोशी के आगाज़ सा लगता है।उलफत के सफर में ठोकर लगीं है मगरसहारा वो अपना अभी भी पास सा लगता हैवफ़ा की कसौटी पे हार गये हमऐसा अब एहसास सा लगता है।मंझर वो भी था कभी दिलफेंक साअब तो राग ये बिना साज का लगता हैइम्तेहान हैं ये इश्क़ के हद्द कीके आलम ये दिल का अब आप सा लगता है।।