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‘फ़रिश्ते कगार पर’ – एक तस्वीरी मज़मून

इस बार पेश करते हैं तस्वीरी मज़मून (फोटो-स्टोरी) छायाचित्रकार अभिजीत अलका अनिल का। सात साल समाजकार्य के क्षेत्र में रहने के बाद, अभिजीत ने जनवरी २०१४ में फ्रीलान्स व्यावसायिक फोटोग्राफी शुरू की। उनके वेबसाइट पर उनके, और उनके काम के बारे में जानें।

अभिजीत का मनोगत:

इस तस्वीरी मज़मून का चयन बांद्रा, मुंबई की एक प्रदर्शनी में २५-२६ जनवरी २०१४ को हुआ था। कहना महत्वपूर्ण है कि तस्वीरों में दिखाई गई औरतों ने स्व-सम्मति से भाग लिया है, क्योंकि वे लैंगिकता संख्यकों के समानाधिकारों में पुख्ता विश्वास रखते हैं। मैंने हमेशा समलैंगिक अधिकारों का समर्थन किया है। मैं समझता हूँ प्रेम असीम है, और उसकी सीमाएं तब बनती हैं, जब वे लोगों द्वारा बनाई जाती हैं। इस विचार को मद्दे-नज़र रखते हुए, हमने यह छोटा-सा तस्वीरी मज़मून बनाया। दुःख की बात है की एक तरफ मंगलयान यशस्वी तरीके से भेजने वाला भारत, एल.जी.बी.टी. लोगों, अधिकारों और प्रेम के विरुद्ध कानून और विपरीत सरकारी रवैय्या रखता है।

बहुत सारे लोगों को क्लोसेट में छुपकर इसलिए रहना पड़ता है कि उन्हें डर होता है कि लोग उन्हें मानसिक तौर पर बीमार न करार करें। समाज का स्ट्रेट (विषमलैंगिक) होने और अपने आप को ऐसे प्रस्तुत करने का दबाव भी है। कल ही एक पत्नी ने अपने पति पर ३७७ लगाया, जब उसने उसे अपने पुरुष प्रेमी के साथ स्पाईकैम पर पकड़ा।

इस छोटी स्टोरी के अलावा मैं एक लेस्बियन/क्वियर जोड़े की रोज़मर्रा ज़िन्दगी को चित्रित करना चाहता हूँ, उनकी लिखित अनुमति के साथ। अगर कोई भाग लेना चाहे तो abhijit@alembic.photography पर मुझे लिखें। मैं प्रकट रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से (जिसमें चेहरा न दिखे) चित्रण कर सकता हूँ, सब्जेक्ट की मर्ज़ी के अनुसार। आशा है आपको मेरा काम पसंद आए और आप मुझे जैसे संभव हो समर्थन दें।

अब पेश है अभिजीत की तस्वीरें:

संकल्पना: ‘क्लोसेट’ (अदृश्यता) के अंदर और बाहर

१) ‘सूर्योदय के इंतज़ार में’:

‘सूर्योदय के इंतज़ार में’

२) ‘क़ुबूल है’:

‘क़ुबूल है’

३) ‘आई लव यू’:

‘आई लव यू’

४) ‘फिर भी परदे के पीछे’:

‘फिर भी परदे के पीछे’

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