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किन्नर अखाड़े का गठन

किन्नर अखाड़ा ट्रांसजेण्डर समुदाय की धार्मिक स्वीकार्यता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। भारत की एक प्रमुख ट्रांसजेण्डर अधिकार कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी तथा उज्जैन स्थितअशोक वाटिका आश्रम के संचालक अजय दास जी महाराज के सहयोग से किन्नर अखाड़े का गठन हुआ। उसकी पूरे भारत की प्रमुख के तौर पर महामंडलेश्वर पद पर कमला गुरु का चुनाव किया गया जो कि पूर्व में मध्य प्रदेश स्थानीय नगर निगम की मेयर के तौर पर चुनाव जीत चुकी है। एक आरोप है कि आज तक लैंगिक अल्पसंख्यकों का काम करनेवाली तथाकथित संस्थाओं के द्वारा धार्मिक लोगों के साथ वकालत का कार्यक्रम फर्जी तौर पर किया जाता था। अगर यह सच है तो यह कहीं से भी उचित नहीं था। छत्तीसगढ़ की किन्नर अधिकार कार्यकर्ता रवीना बारिहा के द्वारा सर्वप्रथम अशोक बाटिका आश्रम के संचालक अजय दास जी महाराज के साथ विगत तीन वर्षों से इस कार्य योजना पर कार्य चल रहा था। इसके फलस्वरुप उपरांत लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के द्वारा इस पर बहुत ही महति कदम उठाने के बाद किन्नर अखाड़े का गठन हुआ।

किन्नर अखाडा: तथा ध्वजारोहण

ध्वजारोहण
अभी तक पूरे भारतवर्ष में १३ अखाड़े हैं जो कि अखाड़ा परिषद के द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। विदित हो कि उज्जैन में अगले वर्ष सिंहस्थ महाकुंभ का आगमन हो रहा है। उसमें किन्नर अखाड़े को स्थानीय प्रशासन के द्वारा अलग से शाही स्नान के लिए जगह की व्यवस्था की मांग की गई है। जिसको लेकर मेला अधिकारी और ज़िला पदाधिकारी से मुलाकात करने पर उनकी सहमति प्राप्त हुई। लेकिन अखाड़ा परिषद के इनकार के बाद उनसे मिलने का कार्यक्रम भी है जिससे हम समझा सकती है कि हमारी संस्कृति का और एतिहासिक साथ किस प्रकार से है किन्नर अखाड़े के गठन में महत्त्व है।
दस दिशाओं के पीठाधीश्वरों मे से छ: दिशा के पीठाधीश्वरों का चयन किया गया। जो कि सर्वसम्मति से किया गया। उसमे उत्तर दिशा के लिए आरती गिरी जी महाराज जो कि हरिद्वार में गोस्वामी समुदाय के अंग हैं। और वह खुद किन्नर भी हैं। इस तरीके से राजस्थान प्रांत की पुष्पाजी को पीठाधीश्वर घोषित किया गया। गुजरात प्रांत की पायल जी को पीठाधीश्वर तथा बिहार से संतोषी किन्नर का पीठाधीश्वर के रुप में पूर्व दिशा के लिए चुनाव किया गया। एवम् छत्तीसगढ़ की प्रमुख किन्नर अधिकार कार्यकर्ता विद्या जी को पीठाधीश्वर मध्य दिशा के लिए किया गया। महाराष्ट्र प्रांत की पायल जी को भी पीठाधीश्वर घोषित किया गया है। जो कि सभी को स्वीकार्य था। सबसे बड़ी बात है कि आज तक समलैंगिकाे के लिए उनके खिलाफ धारा ३७७ पर एक प्रमुख धार्मिक व्यक्ति ने विरोध से अभी तक माननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा आपराधिक कृत्य के रूप में स्वीकार किया गया है जो कि गलत है। इसके लिए सबसे बड़ा रास्ता यह है कि हम अपने आप को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए अपने बहु-संख्यक सनातन धर्म को पालन करने वाले ट्रांसजेण्डर या समलैंगिक समुदाय को जोड़ने की जरुरत है। हिजड़ा समुदाय की धार्मिक मान्यताएं मुस्लिम हिंदू दोनो समुदाय से जुड़ी हुई रहती है।

अखाड़े की महामंडलेश्वर
अच्छा यह बहुत ही अच्छा मौका है कि हम अपने आपको आज की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए अपने आप को सनातनी रुप से अपनी वकालत करें तो हमे अपने आप को समाज में जोड़ने के लिए इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। तथा प्रभावकारी एंव लाभकारी रहेगा। हमारे समुदाय के लिए सिंघस्थ महाकुंभ में समुदाय से आशा की जाती है कि भारी से भारी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। किन्नर अखाड़े का गठन नवरात्रि के प्रथम दिन की गई ४० ट्रांसजेण्डर अधिकार कार्यकर्ता राज्य एवं राष्ट्रिय स्तर की उपस्थिति थी।

पीठाधीश्वरों का चुनाव

स्थानीय प्रशासन एवम स्थानीय लोगों की सहयोग की भावना बहुत ही अच्छी थी। इसमें सदानंद गिरी समुदाय के प्रमुख संत के सहयोग की घोषणा बहुत ही खुशी की अनुभूति आस्था स्थानीय बिल्डर के द्वारा तीन हजार वर्ग फीट आश्रम तथा १० हजार वर्गफीट मंदिर के निर्माण के लिए दान पत्र दिया। जो कि वहां पर स्थाई तरीके से मंदिर निर्माण एवम आश्रम के निर्माण के लिए बहुत ही महंगी जमीन का दान मिलना हमारे लिए स्थानीय लोगों के द्वारा सहयोग की भावना प्रतिबिंब जीत होती है। जिसका हमे सदुपयोग करने की महती आवश्यकता है। जिसका हम अपने से लैंगिक अल्पसंख्यकता को अच्छे तरीके से समाज में ले जाने के लिए जगह मिलेगी किन्नर अखाड़ा देश के इतिहास में और धार्मिक इतिहास में प्रमुखता से जगह पायेगा। मीडिया के द्वारा बहुत ही अच्छा सहयोगी रवैया रहा। यह परिलक्षित हो रहा है कि आगे के दिनों में किन्नर अखाड़े के भविष्य के साथ किन्नर को भविष्य को अगर जोड़ा जाए तो उनकी पहचान के लिए बहुत ही अच्छा समय होगा।

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