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'आँख मिचौली', भाग २। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन।

आँख-मिचौली – मेरी सच्ची जीवन कहानी (भाग २/२)

'आँख मिचौली', भाग २। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। १९६० के दशक में जनमें एक भारतीय समलैंगिक की जीवन कहानी, उनकी ज़बानी। पहला भाग यहाँ पढ़ें। पेश है दो भागों का दूसरा और अंतिम भाग। यह कहानी 'स्वीकृति' मासिक में अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है।  मैं यूनिवर्सिट... Read More...
क्वीयर आज़ादी मुंबई, २०१४। तस्वीर: सचिन जैन।

नक़ाब – एक कविता

'ये नक़ाब उन्हें तुम्हारी ही देन है'। 'क्वीयर आज़ादी मुंबई, २०१४'। तस्वीर: सचिन जैन। नक़ाब चेहरों पर तुमने ओढ़े देखे होंगे नक़ाब उनके पर सच मानो तो हक़ीक़त में ये नक़ाब उन्हें तुम्हारी ही देन है। वो ओढ़े रखना चाहते हैं ये नकाब सिर्फ इसलिए क... Read More...
छलकाएं अपने असली रंग! तस्वीर: बृजेश सुकुमारन।

संपादकीय ४ (१ अप्रैल, २०१४)

छलकाएं अपने असली रंग! तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। इस अंक की थीम है 'असली रंग'। वक़्त आ गया है, कि क्वीयर कम्युनिटी अपने विभिन्न रंगों से समाज को रंगने से नहीं डरे। वक़्त आ गया है कि हमारे जीवन की दिशा और गुणवत्ता को तय करने वालों के असली रंग भी प्रकट हों... Read More...
चुनाव की सरगर्मी।

चुनाव की सरगर्मी

चुनाव की सरगर्मी। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। आने वाले कुछ महीनों में तस्वीर साफ़ हो जाएगी कि देश में किसकी सरकार बनने वाली है।  असल में २०१४ का ये चुनाव अपने में ख़ास है। लोगों में जोश है। वे बदलाव देखना चाहते हैं। साथ ही देश का एक बड़ा तबका फासिस्ट ताक... Read More...
आदित्य और मैं... मैं और आदित्य..।

शृंखलाबद्ध कहानी ‘आदित्य’ भाग ४/५

आदित्य और मैं... मैं और आदित्य..। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। मैं आदित्य से अभिन्न हूं। हम दो शरीर एक जान हैं। पढ़िए कहानी की पहली, दूसरी और तीसरी कड़ी। पेश है चौथी कड़ी: मैंने बिना भविष्य की चिन्ता किए इस प्रश्न का जवाब इस तरह से लिखा-  प्रिय आद... Read More...
ग़ौर फरमाएँ, असलीयत देखें!

पर्दाफ़ाश – एक कविता

ग़ौर फरमाएँ, असलीयत देखें! तस्वीर: जोएल ल ब्र्युषेक। पर्दाफ़ाश जाने क्या दफ़न है खिले हुए चमन में कसकर बंद कफ़न है सच्चाई के दमन में पर्दाफाश करने के लिए क़फ़न उखाड़ना पड़ता है चमन उजाड़ना पड़ता है। नफरत पर चढ़ाई मुस्कान या वाकई खिलखिलाहट है? तन मिठ... Read More...
भ्रम, शर्मिंदगी और इंकार से आत्म-स्वीकृति तक।

आँख-मिचौली – मेरी सच्ची जीवन कहानी (भाग १/२)

भ्रम, शर्मिंदगी और इंकार से आत्म-स्वीकृति तक। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। १९६० के दशक में जनमें एक भारतीय समलैंगिक की जीवन कहानी, उनकी ज़बानी। दो भागों का पहला भाग। कमल का फूल आत्मिक जागृति का प्रतीक माना जाता है। भगवान् बुद्ध ने कली से फूल तक के कमल... Read More...
नमस्ते, मेघालय से!

नमस्ते, मेघालय से

नमस्ते, मेघालय से! तस्वीर: बृजेश सुकुमारन मेरा नाम रेबीना सुब्बा है। मैं एक वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हूँ। मेरे राज्य मेघालय की राजधानी शिलोंग में मैंने और बथशीबा पिंगरोपे, जो स्वयं शिलोंग की लीगल फ्रैटर्निटी का हिस्सा हैं, ने ‘शमकामी’ नामक संस्था... Read More...
इम्फाल प्राइड २०१४

इम्फाल में प्राइड का कमाल

इम्फाल प्राइड २०१४। यूथ हॉस्टल, खुमान लम्पक से परेड की शुरुआत। तस्वीर: कौशिक गुप्ता। इस प्राईड वॉक या गौरव यात्रा का आयोजन १५ मार्च २०१४ को मणिपुर राज्य की राजधानी इम्फाल में हुआ। 'आल मणिपुर नूपी मानबी एसोसिएशन (आमाना)' ने, 'साथी-पहचान' और 'प्रोजेक... Read More...
चुनाव की रंगारंग सरगर्मी में समलैंगिक अधिकारों की दखल?

अधिकार माँगपत्र – समय की ज़रूरत

चुनाव की रंगारंग सरगर्मी में समलैंगिक अधिकारों की दखल? तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। राजनैतिक दलों और राजनीति का हम सब की ज़िन्दगी पर गहरा प्रभाव पड़ता है। देश के संविधान, कानून और नीतियाँ बनाने और पालन करने वाले अक्सर इन्हीं दलों से जुड़े होते हैं। एल... Read More...
'समानुभूति की तुला'

उम्मीद पर दुनिया क़ायम है

'समानुभूति की तुला'; तस्वीर: सचिन जैन। "उम्मीद पर दुनिया क़ायम है" - अम्मा ने मेरे कान में कहा और मुझे कुछ घसीटती, कुछ खींचती, माइक के सामने खड़ा कर, अपनी जगह पर जा कर बैठ गईं।  मुझे एक वाद-विवाद के कार्यक्रम में एक छोटा सा भाषण देना था।   मैं डरा हु... Read More...
चित्रा पालेकर: एक मुलाक़ात

एक मुलाक़ात: चित्रा पालेकर

चित्रा पालेकर: एक मुलाक़ात। छाया: सचिन जैन। चित्रा पालेकर की बेटी शाल्मली ने उन्हें १९९० के दशक में बताया कि वह समलैंगिक है। तबसे चित्रा ने एक लंबा सफ़र तय किया है - समलैंगिकता समझने का और एल-जी-बी-टी समुदाय को अपनाने का। दिल्ली उच्च न्यायलय में एल-ज... Read More...