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कहानी: चादरे

मुझे याद है, मैं और वरुण उन सफ़ेद चादरों के नीचे परछाइयाँ बनाया करते थे, टॉर्च की रौशनी में। कुत्ता, बिल्ली जब कुछ ना बने तो भूऊऊत। उसका हस... Read More...

एक ट्रांस लड़के की व्यथा

मुझे आज भी याद है वो दिन... जब मैं लड़कों के साथ स्कूल में बैठने के लिए तरसता रहता था।रोना आ जाता था लड़किओं के संग बिठाते थे तो। कुछ समझ नही... Read More...

कविता : गुड़िया

गुड़ियाएं मेरे हर राज़ की राज़दार थीकपड़े से बनी, मोटी आँखों वालीअनगढ़ अंगों वाली और हमेशा हँसने वालीजब से बड़ा हुआ, मैंने हर अपना दुख कह दिय... Read More...

Women

Literature