हिंदी कहानी

'संगिनी' - एक कहानी (भाग ४/५) | छाया: भूपेश कौरा | सौजन्य: क्यूग्राफ़ी |

‘संगिनी’ (श्रृंखलाबद्ध कहानी भाग ४/५)

कहानी की पिछली कड़ियाँ यहाँ पढ़ें: भाग १ | भाग २ | भाग ३ | डॉक्टर सीमा की बात सुन श्याम ने हैरत से मनीषा की तरफ देखा। उसे इस बात पर आश्चर्य हुआ। मनीषा ने शर्म से ... Read More...
'संगिनी' - एक कहानी (भाग ३/५) | छाया: श्रेयांस जाधव | सौजन्य: क्यूग्राफ़ी |

‘संगिनी’ (श्रृंखलाबद्ध कहानी भाग ३/५)

धर्मेन्द्र राजमंगल की कहानी ‘संगिनी’के पिछले २ भाग यहाँ पढ़ें: | भाग १ | भाग २ | प्रस्तुत है भाग ३: श्याम इस इशारे को समझ गया था। उसने बेड से उठते हुए कहा, ‘‘क... Read More...
'संगिनी' - एक कहानी (भाग १/५) | छाया: पीनल देसाई| सौजन्य: क्यूग्राफ़ी |

‘संगिनी’ (श्रृंखलाबद्ध कहानी भाग २/५)

कहानी की पहली कड़ी यहाँ पढ़ें। सोचती थी कि भगवान ने उसका मन ऐसा क्यों बनाया जो लड़की होकर भी एक लड़की को चाहने का मन करता है। क्यों ऐसी भावनायें उसके अन्दर भर दीं ... Read More...
'संगिनी' - एक कहानी (भाग १/५) | छाया: अविजित चक्रवर्ती | सौजन्य: क्यूग्राफ़ी |

‘संगिनी’ (श्रृंखलाबद्ध कहानी भाग १/५)

जब से मनीषा की शादी तय हुई तभी से उसकी बेचैनी सातवें आसमान पर थी। उसने सपने में भी शादी के बारे में नहीं सोचा था। वो तो शादी करना ही नहीं चाहती थी। उसने सीधे अप... Read More...