Hindi Gay Kahani

सपनों पे भारी समाज

विजय की सहनशक्ति तब खत्म हुई जब हर कोई उसे चिढ़ाने लगा, कोई कहता था "तू इस कॉलेज से चला जा तेरे जैसों का यहाँ कोई काम नहीं" तो कोई उसके सामने "ए छक्के" कहकर चिढ़ाता था।

हाथों की मेहंदी

लड़के कब से हाथों में मेहंदी लगवाने लगे? ये लड़कियों वाले शौक क्यों पाल रखे हैं? और सवालों की इन झड़ी में सबसे मुश्किल सवाल - तू लड़का ही है ना?

दोस्ती की नई परिभाषा

अब हम अच्छे दोस्त हैं और मुझे नहीं लगता कि दुनिया में दोस्ती से बड़ा कोई रिश्ता हो सकता है क्योंकि इसके कोई दायरे या सीमाएँ नहीं होती

कहानी : रूममेट

अर्जुन नाम था उसका, कद काठी मेरी तरह, सांवला रंग और मेरी आँखे उसे देखती ही रह गयी। ऐसा नहीं था कि वो सुन्दर था पर वो 'वोह' था!
तस्वीर: गोपीनाथ मेनन, सौजन्य: QGraphy

कहानी: चड्डी में हाथ

तुम्हें ढूंढ़ते हुए आऊँ तुम्हारे शहर तक, तुम्हारी गली तक, तुम्हारे घर तक, उस बिस्तर तक जिस पर तुम पड़े हो , चड्ढी में हाथ डाले हुए।
आधा इश्क (८/१०) | तस्वीर: राज पाण्डेय | सौजन्य: QGraphy

कहानी : स्वीकार

सुरेश उसकी सच्चाई नहीं जानता था इसलिए गुरमीत को डर था कि कहीं वो उसे खो ना दे क्योंकि इससे पहले गुरमीत ने कभी खुद को इतना खुश और कम्फ़र्टेबल महसूस नहीं किया था

कहानी : रंगीली और उसकी मौत का रहस्य

बचपन से ही लगता है कि या तो मैं पागल हूँ, या फिर मेरे आस पास जितने भी लोग है वो पागल हैं। अम्मा कहती थी थोड़ा अलग सा हूँ सबसे। बड़े हुए तो पता चला कि हम सबकी अ... Read More...
men and taj mahal

कहानी: बचपन का प्रेम

"जब किसी की तरफ दिल झुकने लगे, बात आकर ज़बाँ तक रूकने लगे, आँखों-आंखों में इकरार होने लगे,बोल दो अगर तुम्हें प्यार होने लगे, होने लगे... होने लगे" क्या इतन... Read More...

कहानी : पहली मुलाक़ात

कुछ तो बात थी उसमें, वर्ना घर से इंटरव्यू का बहाना बनाके, 500 किलोमीटर की दूरी तय करना, मुझ जैसे डरपोक इंसान के लिए मुमकिन नहीं था। हाँ, मैं उससे मिला, जब प... Read More...

कहानी: बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम

आज दूसरा दिन था जब उसने मेरा फ़ोन नहीं उठाया था। मैं हर बार करता और वह नहीं उठाता। उसने मुझसे वादा किया था की वह कोई और कैब नहीं चलाएगा, ऐसा इसलिए क्योंकि वह एक... Read More...

कहानी : करेला – दो युवाओं की प्रेम कहानी

शरद को भरवां करेले पसंद थे। भरवां करेले देख कर संभव के टिफ़िन पर वो ऐसे टूट पड़ता मानो कि भिखारी को खज़ाना मिल गया हो। शरद और संभव एक ही कॉलेज में पड़ते थे और ... Read More...

कहानी : रेनकोट

रवि : "मैंने बताया होगा मेरे TCS के दोस्त वरुण के बारे में; जो मुझे बुक्स दिया करता था।"  बारिश हो रही थी सो आज दोनों को एक ही ऑटो करना पड़ा था; शौर्य एक अ... Read More...