Queer Poetry

क्वीयर आज़ादी मुंबई, २०१४। तस्वीर: सचिन जैन।

नक़ाब – एक कविता

'ये नक़ाब उन्हें तुम्हारी ही देन है'। 'क्वीयर आज़ादी मुंबई, २०१४'। तस्वीर: सचिन जैन। नक़ाब चेहरों पर तुमने ओढ़े देखे होंगे नक़ाब उनके पर सच मानो तो हक़ीक़त म... Read More...
ग़ौर फरमाएँ, असलीयत देखें!

पर्दाफ़ाश – एक कविता

ग़ौर फरमाएँ, असलीयत देखें! तस्वीर: जोएल ल ब्र्युषेक। पर्दाफ़ाश जाने क्या दफ़न है खिले हुए चमन में कसकर बंद कफ़न है सच्चाई के दमन में पर्दाफाश करने के लिए क़फ़... Read More...
'तुम्हारे बाद' - एक कविता

तुम्हारे बाद – एक कविता

'तुम्हारे बाद' - एक कविता। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। तुम्हारे बाद। कभी मैंने तुम को यादों कि फुलझड़ी बना दिया उन रातों को भरने के लिए जिनमें खुद को तनहा पाया... Read More...
Hello 377

‘हैलो ३७७’ – एक कविता

हैलो ३७७; छाया: बृजेश सुकुमारन हैलो ३७७. आज मुझे तुमसे कुछ बातें कहनी हैं. मुझे ये जो ज़रूरत महसूस होती है अचानक बेबाक कहने की- मुझे उससे प्यार है, मुझे प्य... Read More...