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रविश के नाम ट्रांस* बिल के विरोध में खत

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ हिंसा करने वाले लोगों को सिसजेंडर लोगों के साथ हिंसा करने वाले लोगों से कम सज़ा देकर क्या साबित करना चाहते हैं? कि ट्रांसजेंडर समुदाय की जान का कोई मूल्य नहीं है?

कविता : नदी के किनारे

नदी के दो किनारे थे हम, एक दूसरे से बिल्कुल अलग। हमारा एक होना, लगभग नामुमकिन और हमारा एक होना, मतलब नदी का अंत।

अफ़ग़ानी होते हुए भी, खुद को भारतीय के रूप में स्वीकारना

द कारपेट वीवर पूरब भर के सभी LGBTQIA के लिए एक आवाज़ और एक पात्र बन गया जो समलैंगिकता को छुपाये हुए हैं, क्योंकि उन्हें जान का खतरा है या कारावास या अन्य प्रकार के उत्पीड़न का डर है।

कविता : वजूद

जब दुनिया ने मुझे मुझसे भरमाया. तब मैंने अपना 'वजूद' अपनाया।

5 साल से घरवालों से दूर रहनेवाले समलैंगिक लड़के का अपनी माँ को खत

माँ पहले आप मेरे लिए रोती थी, आज मैं आपके लिए रोता हूँ। माँ मुझे आपकी बहुत बहुत याद आती हैं। आँखों से आँसू आते हैं तो थमने का नाम ही नही लेते।

कहानी : रंगीली और उसकी मौत का रहस्य

बचपन से ही लगता है कि या तो मैं पागल हूँ, या फिर मेरे आस पास जितने भी लोग है वो पागल हैं। अम्मा कहती थी थोड़ा अलग सा हूँ सबसे। बड़े हुए तो पता चला कि हम सबकी अम्मा हम सबसे यही कहती हैं। काफी वक्त ये सोचने में ज़ाया किया कि हम में औरों से क्या अलग है... Read More...
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देखिये: कैसे इस गे पंजाबी अभिनेता की ज़बरदस्ती शादी करदी गई, जिससे उसकी ज़िन्दगी में आई ढेरों परेशानियाँ

जसप्रीत सिंह, उर्फ़ जैज़, एक अभिनेता, होस्ट और प्रोग्राम डायरेक्टर हैं जिन्होंने फिल्मों में भी काम किया है। जसप्रीत ने 2006 में आयी विवाह फिल्म में शाहिद कपूर के साथ बतौर अभिनेता काम किया। पंजाब के पटियाला शहर के रहने वाले जसप्रीत काम के सिलसले में... Read More...
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377 से आज़ादी के एक साल – क्या सच में कुछ बदला?

आज़ादी के एक साल पूरे हुए। अब देखना ये है कि इस एक साल में एलजीबीटी+ समुदाय का जीवन कितना सुधरा ? बेशक हम ये कह सकते हैं कि हमारे ऊपर से 'कानूनी मुजरिम' होने का कलंक मिट गया और अब कानून भी हमारे साथ है। लेकिन जो सबसे अहम चीज़ है वो है समाज का नज़रिय... Read More...
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कहानी: बचपन का प्रेम

"जब किसी की तरफ दिल झुकने लगे, बात आकर ज़बाँ तक रूकने लगे, आँखों-आंखों में इकरार होने लगे,बोल दो अगर तुम्हें प्यार होने लगे, होने लगे... होने लगे" क्या इतना आसान है बोलना जैसा फिल्मों में दिखाते हैं? कम से कम मेरे लिए तो नहीं था। आखिर क्यों? ये ... Read More...