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Recognition of Relationships...Photo Credit: QGraphy & Avinash Singh

समाज

सबकी अपनी अपनी प्राथमिकताएं होती हैं। सबको अधिकार है अपनी मर्जी के मुताबिक ज़िन्दगी जीने का।

सपनों पे भारी समाज

विजय की सहनशक्ति तब खत्म हुई जब हर कोई उसे चिढ़ाने लगा, कोई कहता था "तू इस कॉलेज से चला जा तेरे जैसों का यहाँ कोई काम नहीं" तो कोई उसके सामने "ए छक्के" कहकर चिढ़ाता था।

हाथों की मेहंदी

लड़के कब से हाथों में मेहंदी लगवाने लगे? ये लड़कियों वाले शौक क्यों पाल रखे हैं? और सवालों की इन झड़ी में सबसे मुश्किल सवाल - तू लड़का ही है ना?

अलैंगिकता (असेक्सयूएलिटी) क्या है?

एसेक्सुअलिटी एक यौन अभिविन्यास है जहाँ किसी भी लिंग के प्रति यौन आकर्षण का लगातार अभाव है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि ऐसे लोगों में भावनायें नहीं होती, या संवेदनाएँ नहीं होती।

समलैंगिकता: नज़रिया और कानून

यह कहना कि, विश्व के अलग-अलग हिस्सों में लैंगिक अनुरूपता अलग-अलग दिखायी देती है, बहुत छोटी बात लगती है। लेकिन समलैंगिकों के प्रति भी सांस्कृतिक और व्यक्तिगत नजरिया व्यापक रूप से भिन्न है।

#RhymeAndReason: अस्तित्व

रंग कितने थे वो भीतर जानने मैं चल पड़ा, तन्हाईयों से गुफ़्तगू करने को मैं फिर चल पड़ा
'मैं हूँ' (तस्वीर: कार्तिक शर्मा, सौजन्य: QGraphy)

समलैंगिकता से जुड़े 10 मिथ्य

समलैंगिकता से जुड़ी कई गलत धारणाएँ हम अक्सर सुनते रहते हैं। इंटरनेट के इस युग में, समलैंगिकता विरोधी लोग मिथ्य बातों का प्रचार करते हैं

दोस्ती की नई परिभाषा

अब हम अच्छे दोस्त हैं और मुझे नहीं लगता कि दुनिया में दोस्ती से बड़ा कोई रिश्ता हो सकता है क्योंकि इसके कोई दायरे या सीमाएँ नहीं होती