Hindi

मुग़ल दौर का वह नंगा फ़क़ीर जिसे एक लड़के से मोहब्बत थी

दिल्ली की मशहूर जामा मस्जिद के निचे एक लाल रंग की मज़ार है।वह मज़ार है सूफी संत सरमद शहीद कशानि की। जब आप इनकी कहानी सुनेंगे तो आप अपने दोस्तों में, जानने वालों में, इनके बारे में बात ज़रूर करेंगे। आपका ज़्यादा वक़्त न लेते हुए मैं सीधी इनकी कहानी पर आता... Read More...

कहानी: चादरे

मुझे याद है, मैं और वरुण उन सफ़ेद चादरों के नीचे परछाइयाँ बनाया करते थे, टॉर्च की रौशनी में। कुत्ता, बिल्ली जब कुछ ना बने तो भूऊऊत। उसका हसता हुआ चेहरा जिसे मैं आज तक नहीं भूला, हर चीज़ धुँधला गयी है पर उसका चेहरा वैसा का वैसा है यादो में। मेरा ... Read More...

एक ट्रांस लड़के की व्यथा

मुझे आज भी याद है वो दिन... जब मैं लड़कों के साथ स्कूल में बैठने के लिए तरसता रहता था।रोना आ जाता था लड़किओं के संग बिठाते थे तो। कुछ समझ नहीं पाया था वो पहला पीरियड का दाग जो पैंट पर लगा था।बहुत गुस्सा आता था जब कोई मुझे लड़की कह कर बुलाता था। और मेरे... Read More...

कविता : गुड़िया

गुड़ियाएं मेरे हर राज़ की राज़दार थीकपड़े से बनी, मोटी आँखों वालीअनगढ़ अंगों वाली और हमेशा हँसने वालीजब से बड़ा हुआ, मैंने हर अपना दुख कह दिया इनसेअपनी हर खुशी बता दी, बांट ली। माँ बाज़ार से नही खरीद पाती थी महँगे खिलौनेपुराने सफेद साये से बना देती ... Read More...

कैंसर

पापा को कैंसर था। उनके बाद गुज़रा हुआ वक़्त, अब उनके साथ गुज़ारे हुए वक़्त से ज़्यादा हो गया है। वो क्या थे? वो कैसे बात करते थे? मैं कुछ पक्के तौर पर नहीं कह सकता। बस कुछ थोड़ी सी खुशनुमा सी यादें है; उनका मुझे गोद में उठाकर ज़ोर से हँसने की; वो बाहर ग... Read More...

वो आख़िरी मुलाकात…

नमन ने कपड़े पहने और जाने के लिए तैयार हो गया। जैसे ही वह दरवाजे से बाहर निकला, मैने उसे आखिरी बार देखा और उसे एक मुस्कान दी। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, मैं ज़ोर ज़ोर से रोने लगा। ये दिन और वह दिन जब हम पहली बार मिले थे मेरे इसी घर में। रविवार... Read More...

बचपन मे हुए यौन शोषण के ज़ख्म…

बात  उस  समय की है जब में नौ साल का था। जहाँ बचपन से ही हमेशा मेरे साथ के सारे दोस्त व भाई क्रिकेट व फुटबॉल खेलने के लिए हमेशा तैयार रहते थे वहीँ मेरा मन अपनी बहनों के साथ गुड़िया गुड्डो से खेलने का करता था।बस यही वह समय था जब मेरी दुविधा ... Read More...

कविता : इक गे की अधूरी कहानी…

दुपट्टा मम्मी का लेकर , कभी साड़ी पहनता थाकभी बहनो के संग में वो, घर घर खेल लेता थाअगर खेलेगा ये, तो मैं नहीं खेलूंगा दोस्तोंबड़े भाई की ईग्नोरेनंस, वो अक्सर झेल लेता था पापा मम्मी से कहते - "सम्भालो अपने लड़के को,बड़ा होके ये इक दिन, मेरी बदनामी... Read More...

कविता : मुखौटा

यूं तो बस मैंने अपने आप को था अपनाया,सिर्फ़ अपनी ख़ुशी के लिए कुछ करना था चाहा।कुछ थे हमारे साथ, जिन्होंने साथ छोड़ दिया,कुछ ने थामा हुआ हमारा, हाथ छोड़ दिया।कुछ ऐसे भी थे जो समझे ही नहीं बात हमारी,और उन कुछ ने, करना तक हमसे बात कर छोड़ दिया।। रह... Read More...

4 साल के रिश्ते में आयी दूरियों को हमने कुछ ऐसे मिटाया…

यह दूसरी बार था, जब मैंने उसे ग्राइंडर पर पकड़ा था। अभी उसे बताना नहीं चाह रहा था क्योंकि उसकी परीक्षा चल रही है। इंतज़ार कर रहा था कि कब उसकी परीक्षा ख़त्म हो और उस से इस बारे में बात करूँ। मन बहुत बैठा जा रहा था। उसे खोने का डर हावी हो रहा था। वैसे भ... Read More...
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कविता : लड़का हूँ और लड़के से प्यार करता हूँ

ये कहानी नहीं एक हकीकत हैं ये कहानी नहीं एक हकीकत हैं कागज़ पेन से नहीं, दिल से बयां करता हूँ।लड़का हूँ और लड़के से प्यार करता हूँ।। समलैंगिक हूँ कोई अभिशाप नहींसमलैंगिक हूँ कोई अभिशाप नहींअपनी पहचान पर अभिमान करता हूँ।लड़का हूँ और लड़के से प्यार कर... Read More...

जेंडर के ढाँचे से जूझता मेरा बचपन

मैं बचपन से ही बहुत ही नटखट, चुलबुला और थोड़ा अलग बच्चा था| मेरी माँ फिल्मों और गानों की बहुत शौक़ीन थी| माँ के दुपट्टे की साड़ी पहनना, नाचना-गाना, मेरे बचपन के खेल थे| कभी मेरे दादा तो कभी कोई पड़ोस की दीदी इस खेल में मेरा पूरा साथ देतीं, जो भी फिल... Read More...