Poem

कविता : बंदिशें

ये किस तरह की बंदिशों में कैद हूँ मैं? क्यों इस तरह घुट-घुट के जीने को मजबूर हूँ मैं?

कविता : नदी के किनारे

नदी के दो किनारे थे हम, एक दूसरे से बिल्कुल अलग। हमारा एक होना, लगभग नामुमकिन और हमारा एक होना, मतलब नदी का अंत।

कविता : वजूद

जब दुनिया ने मुझे मुझसे भरमाया. तब मैंने अपना 'वजूद' अपनाया।
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Poem : Proud of Being Me

They say am cursed, am a sinner, Yes I am, in all glamour. They say am against God, am not pious, Yes I am not, I love being inauspicious.
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Poem: Happily Gay

I'm born this way & I'mhappily grateful & beautiful all my ways. I'm not gonna wait for any society, any strangers, any government to decide my righ... Read More...

कविता : गुड़िया

गुड़ियाएं मेरे हर राज़ की राज़दार थीकपड़े से बनी, मोटी आँखों वालीअनगढ़ अंगों वाली और हमेशा हँसने वालीजब से बड़ा हुआ, मैंने हर अपना दुख कह दिया इनसेअपनी हर खुशी ब... Read More...
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Poem: Judgemental Queers

“No fat, no femme, no slim, not them.”I cringed at the words, my eyes bled. I flinched a little as I furthermore read..“Not above thirty, not below nineteen,No... Read More...