गे कविता

कविता: रिश्ते

जो समाज कि नज़र से न डरते थे कभी, वो "लोग क्या कहेंगे" सोच के झिजकते भी हैं

कविता: एक ऐसी दुनिया

मुझे हँसी आती है इस बात पर कि कैसे कुछ लोग आज भी दो पुरुषों के प्रेम को पाप समझते हैं
crying eye

कविता : दद्दा

मैं ढूँढता रहता हूँ ख़ुद को, शराब की ख़ाली बोतलों में. लुढ़के हुए गिलासों, जूठी तश्तरियों में
Krishna

कविता: सारथी

हर प्रेमकहानी में राधा कृष्ण नहीं होते।कुछ प्रेमकहानियों मेंं कृष्ण और अजुर्न भी होते हैं...मेरा तात्पर्य किसी समलैंगिक रिश्ते से नही है... मेरा सिर्फ इतना ... Read More...