Issue 05 on 2014 May 01

आदित्य भाग ५। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन।

शृंखलाबद्ध कहानी ‘आदित्य’ भाग ५/५

आदित्य भाग ५। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। मैं आदित्य से अभिन्न हूं। हम दो शरीर एक जान हैं। पढ़िए कहानी की पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी कड़ी। पेश है पाँचवी और आखरी ... Read More...
'उपेक्षा का अनुभव'। संपादकीय, मई १, २०१४। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन।

संपादकीय ५ ( ०७ मई २०१४)

'उपेक्षा नहीं, समावेश'। संपादकीय, मई १, २०१४। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। इस अंक की थीम है 'समावेश'। रूबिक्स क्यूब। प्लास्टिक की मामूली चौकोरी। लेकिन उसकी ६ रंगो... Read More...
थर्ड जेंडर का आधा-अधूरा हक़। छाया: अमोल पालकर।

‘थर्ड जेंडर’ का आधा-अधूरा हक़

थर्ड जेंडर का आधा-अधूरा हक़। छाया: अमोल पालकर। पिछली दफ़ा साल २०१३ में समलैंगिकता से जुड़े मुद्दे के बाद जेंडर/लिंग/यौनिकता से जुड़ा एक दूसरा मामला देश के सर्वोच्... Read More...
ट्रांस पुरुष, सशक्तिकरण की और

ट्रांस मैस्क्युलाइन लोगों का पत्र, केंद्रीय समाजकल्याण मंत्रालय को

छाया: संपूर्ण भारत का सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय पहली बार ट्रांस समुदाय के लिए एक नीति बनाने वाला है। इस सिलसिले में ट्रांसजेंडर लोगों, खासकर ट्रांस ... Read More...
चाहत, ख्वाजा सिरा, कराची, पाकिस्तान। तस्वीर: शरमीन उबैद फिल्म्स।

कराची के ख्वाजा सिरा

चाहत, ख्वाजा सिरा, कराची, पाकिस्तान। तस्वीर: शरमीन उबैद फिल्म्स। बुझी हुई मोमबत्तियां, क्रीम के बंद डिब्बे। एक ख्वाजा सिरा की दास्ताँ का आग़ाज़। "मुझे बहुत अच्छ... Read More...
मुझे रंग दे बेमिसाल: नील, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल! छाया: रूपबान।

बांग्लादेश में मानवीय इन्द्रधनुष!

मुझे रंग दे बेमिसाल: नील, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल! छाया: रूपबान। बांग्ला नूतन वर्ष १४ अप्रैल, २०१४ को 'पोएला बोइशाख' के अवसर पर बांग्लादेश की राजधानी ढाक... Read More...
पुढील स्टेशन? समानाधिकार सेन्ट्रल! छाया: सचिन जैन।

अगला स्टेशन? क्वीयर आज़ादी!

पुढील स्टेशन? समानाधिकार सेन्ट्रल! छाया: सचिन जैन। ११.१२.१३ के सुप्रीम कोर्ट के भारतीय दंड संहिता की धारा ३७७ को बरक़रार रखने के अपने फेसले ने आपसी सहमती से हु... Read More...
'आँख मिचौली', भाग २। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन।

आँख-मिचौली – मेरी सच्ची जीवन कहानी (भाग २/२)

'आँख मिचौली', भाग २। तस्वीर: बृजेश सुकुमारन। १९६० के दशक में जनमें एक भारतीय समलैंगिक की जीवन कहानी, उनकी ज़बानी। पहला भाग यहाँ पढ़ें। पेश है दो भागों का दूसरा ... Read More...
क्वीयर आज़ादी मुंबई, २०१४। तस्वीर: सचिन जैन।

नक़ाब – एक कविता

'ये नक़ाब उन्हें तुम्हारी ही देन है'। 'क्वीयर आज़ादी मुंबई, २०१४'। तस्वीर: सचिन जैन। नक़ाब चेहरों पर तुमने ओढ़े देखे होंगे नक़ाब उनके पर सच मानो तो हक़ीक़त म... Read More...