कविता : है दूर मगर

wp

अधिकार ढूँढ़ कर लाएँगे ।।
घुटन भरी इस जीवन को,
अब सहन नहीं कर पाएँगे ।।

जहाँ प्रेम नहीं, ना अपनापन,
वहाँ नहीं रह पाएँगे ।।
है हम अलग दुनिया से,
ताना नहीं सुन पाएँगे ।।

तेरे समाज के ज़ंजीरों से,
है बंधे हमारे पाँव ।।
घायल पड़ा यह दिल है,
तन पर लगे हैं घाव ।।

आत्मा में चली है आँधी,
दिलों में झंझावात है ।।
स्वतंत्रता का सूर्य, प्रकाश लाएगा,
छोटी यह काली रात है ।।

कर लिया सितम दुनिया ने,
पर प्यार को कहाँ हरा पाएँगे ।।
हर युग को जीता है हमने,
इस बार भी बाज़ी मार लाएँगे।।

रितिक चक्रवर्ती (Ritwik Chakravarty)

रितिक चक्रवर्ती लखनऊ के रहने वाले हैं और पिछले 4 सालों से एलजीबीटी समाज के मुद्दों पर काम कर रहें हैं l लखनऊ के अवध क्वीर कम्युनिटी के साथ सुचारू रूप से काम करते हुए मुख्यधारा के लोगों को एलजीबीटी मुद्दों पे अपने कविता लेखों के माध्यम से जागरूक करते रहते हैं l इसी के साथ वे माइथॉलजिस्ट की भूमिका में भारतीय अध्यात्म संस्कृति में क्वीर समुदाय की पहचान को प्रकाशित करते हैं l
रितिक चक्रवर्ती (Ritwik Chakravarty)

Latest posts by रितिक चक्रवर्ती (Ritwik Chakravarty) (see all)