‘कुदरती शनाख्त’ यह प्रदर्शनी प्यार का उत्सव मनाती है। प्यार दो लोगों के बीच, जो शायद समाज कथित दायरों और सीमाओं से बाहर है।

वे समाज के हाशिये पर, मुख्य धारा से अलाहिदा किये जाते हैं। बहुत सारे ट्रांसजेंडर लोग अधिकारियों, परिवार जनों और समाज द्वारा की गई शारीरिक और मानसिक हिंसा का अनुभव करते हैं।

 

 

ये सारे सितम वे सहते आएं हैं और आज भी सहे जा रहे हैं। ऐसी गिनी-चुनी मिसालें हैं, जिनमें ट्रांसजेंडरों ने पनपकर समाज की मुख्य धारा में अपना प्रभाव स्थापित किया है। यह सत्य इस बात की अलामत है कि समाज में सहिष्णुता के कुछ अवशेष आज भी बरक़रार हैं।

अन्य तस्वीरें और छायाचित्रकार के मनोगत देखिए और पढ़िए, फोटो एसे की दूसरी कड़ी में अगले अंक में।
नफ़ीस अहमद ग़ाज़ी की तस्वीरें आप इस फेसबुक पृष्ठ पर देख सकते हैं।

‘कुदरती शनाख्त’ यह प्रदर्शनी प्यार का उत्सव मनाती है। प्यार दो लोगों के बीच, जो शायद समाज कथित दायरों और सीमाओं से बाहर है।

वे समाज के हाशिये पर, मुख्य धारा से अलाहिदा किये जाते हैं। बहुत सारे ट्रांसजेंडर लोग अधिकारियों, परिवार जनों और समाज द्वारा की गई शारीरिक और मानसिक हिंसा का अनुभव करते हैं।

 

 

ये सारे सितम वे सहते आएं हैं और आज भी सहे जा रहे हैं। ऐसी गिनी-चुनी मिसालें हैं, जिनमें ट्रांसजेंडरों ने पनपकर समाज की मुख्य धारा में अपना प्रभाव स्थापित किया है। यह सत्य इस बात की अलामत है कि समाज में सहिष्णुता के कुछ अवशेष आज भी बरक़रार हैं।

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कुदरती शनाख्त – एक तस्वीरी मज़मून (भाग १)

[caption id="attachment_6295" align="aligncenter" width="960"]नफ़ीस अहमद ग़ाज़ी: तस्वीरी मज़मून १.१ नफ़ीस अहमद ग़ाज़ी: तस्वीरी मज़मून १.१[/caption]

‘कुदरती शनाख्त’ यह प्रदर्शनी प्यार का उत्सव मनाती है। प्यार दो लोगों के बीच, जो शायद समाज कथित दायरों और सीमाओं से बाहर है।

[caption id="attachment_6296" align="aligncenter" width="960"]नफ़ीस अहमद ग़ाज़ी: तस्वीरी मज़मून १.२ नफ़ीस अहमद ग़ाज़ी: तस्वीरी मज़मून १.२[/caption]

वे समाज के हाशिये पर, मुख्य धारा से अलाहिदा किये जाते हैं। बहुत सारे ट्रांसजेंडर लोग अधिकारियों, परिवार जनों और समाज द्वारा की गई शारीरिक और मानसिक हिंसा का अनुभव करते हैं।

[caption id="attachment_6303" align="aligncenter" width="960"]नफ़ीस अहमद ग़ाज़ी: तस्वीरी मज़मून १.३ नफ़ीस अहमद ग़ाज़ी: तस्वीरी मज़मून १.३[/caption]

 

 

ये सारे सितम वे सहते आएं हैं और आज भी सहे जा रहे हैं। ऐसी गिनी-चुनी मिसालें हैं, जिनमें ट्रांसजेंडरों ने पनपकर समाज की मुख्य धारा में अपना प्रभाव स्थापित किया है। यह सत्य इस बात की अलामत है कि समाज में सहिष्णुता के कुछ अवशेष आज भी बरक़रार हैं।

अन्य तस्वीरें और छायाचित्रकार के मनोगत देखिए और पढ़िए, फोटो एसे की दूसरी कड़ी में अगले अंक में।
नफ़ीस अहमद ग़ाज़ी की तस्वीरें आप इस फेसबुक पृष्ठ पर देख सकते हैं।

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