कहानी: बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम

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आज दूसरा दिन था जब उसने मेरा फ़ोन नहीं उठाया था। मैं हर बार करता और वह नहीं उठाता। उसने मुझसे वादा किया था की वह कोई और कैब नहीं चलाएगा, ऐसा इसलिए क्योंकि वह एक कैब ड्राइवर था, और मैं एक कॉर्पोरेट एम्प्लोयी। हमारा मिलना भी उसी में हुआ था, रोज़ उसी के कैब से मैं आया जाया करता था। उसने कभी कुछ कहा या किया नहीं, ना मैंने। उसकी नज़रें, और मेरे तरफ देखने का तरीका ही काफी था।आँखों ही आँखों में बहुत सी बातें हो जाती थी हमारे बीच जिसमें लफ़्ज़ों का कोई काम नहीं।

साल हो गया था साथ आते-जाते, कितना कुछ अलग था हमारे बीच, वह हमारे इलाके का सबसे दबंग आदमी था। सब डरते थे उससे, कुछ ना होकर भी बहुत कुछ था वह अपने साथियों के बीच। बात के बदले गाली, और किसी के जवाब के पहले थप्पड़ तैयार रखता था वह। डॉन की तरह रुतबा था उसका, और मैं एक दुबला पतला, लेकिन स्मार्ट कॉर्पोरेटर। जब पहली बार मुझे देख कर मुस्कुराया था, मुझे याद है। जब वो मुझे देख कर शर्मा जाया करता था, याद है जब उसने मेरा रास्ता रोका था, याद है जब मैं रोज़ लेट होने के बाद भी उसी की गाड़ी में जाया करता था। जो किसी की बात बर्दाश्त नहीं करता था, वो मेरी बचकानी हरकतों से खुश हो जाया करता था, इतना जितना कोई अपने बेटे की बर्दाश्त नहीं करता। मुझे याद है जब मेरा जन्मदिन सेलिब्रेट करने हम बाहर गए थे, कितना मानाने के बाद वो माना था। याद है जब उसने पहली बार पिज़्ज़ा देखा था, और उसके खाने का तरीका देख कर मुझे हँसी आ गयी थी; उसी दिन उसने मुझे कहा था की शायद उसे दूसरी गाड़ी चलानी पड़े, जो मेरे टाइम के हिसाब से मैच नहीं करती। मैंने कितना मना किया था उसे। याद है जब उसने मुझे घर छोड़ते वक़्त सेल्फी लेने के बहाने ज़ोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया था, लेकिन तब भी कोई बात नहीं हमारे बीच, सिर्फ उसकी आँखें कह रही थी मेरी आँखों से, की आज मत रोको और मैं हस कर अलग हो गया था, सेल्फी के बाद। मेरे लिए उसका साथ होना ही काफी था। और आज पूरे तीन दिन बाद मैंने उसे फ़ोन किया था, और ये पहली बार था जब उसने नहीं उठाया था।

आँखों ही आँखों में बहुत सी बातें हो जाती थी हमारे बीच जिसमें लफ़्ज़ों का कोई काम नहीं

देख लिया था मैंने उसे दूसरी गाड़ी में। मुझे लगा शायद मुझसे पीछा छुड़ाने के लिए उसने ये किया हो, और बताया भी नहीं, क्योंकि मना करने के बाद भी वो ऐसा करे ये जानने के बाद की उसकी दूसरी जॉब में मैं उसे नहीं मिल पाऊँगा। बहुत गुस्सा आया, फिर भी मैं उसके टाइम पर गया, उसकी नयी गाड़ी में, जो मुझे सूट नहीं करता था। मुझे देख कर उसकी आँखों में शर्मिंदगी थी। कितना चिल्लाया था मैं उसपे, और उसने मुझे कहा था मेरी बातों से वो डिस्टर्ब होता है। पहली बार था जब हमारे बीच लड़ाई हुई थी, कितना बोले थे हम एक दूसरे को, मैंने भी सोच लिया था की अब इससे ब्रेक उप करके रहूँगा। दूसरे दिन मैं उसे मिला ही नहीं, सोच लिया था की अपने दिमाग से निकाल कर रहूँगा उसे, पर पता नहीं क्यों अब पहले से ज़्यादा याद आ रही थी उसकी।

दिमाग हटाने के लिए ग्राइंडर पे प्रोफाइल बनाया, 10 मिनट में कितने ऑफर आ गए, कुछ पैसे देने को तैयार थे तो कुछ ज़िन्दगी भर का साथ, पर पता नहीं क्यों हर बार दिल मना कर देता ये सब करने को। आखिर एक ऑफर एक्सेप्ट किया। ५ स्टार होटल में ले गया वो। जब उसने कपड़े उतारने को कहा, पता नहीं क्यों उसकी याद आगयी। आज तक उसने कभी छुआ भी नहीं था। जब उसने करना शुरू किया, मुझे लगने लगा मानो वो मेरे सामने खड़ा होके देख रहा है। उसकी आवाज़ मेरे कानों में गूँजने लगी, जैसे-जैसे यह मुझे छूता, उसकी परछाई मेरे सामने खड़ी हो कर मुस्कुराने लगती। जैसे उसने मुझे पहली बार देख कर मुस्कुराया था; ऐसा लगने लगा, वो मानो मुझे अपने पास बुला रहा है। झटके से उसे अपने ऊपर से हटा कर, कपड़े पहने मैंने और निकल गया। अब समझ नही आया की कैसे भुलाऊँ उसे, उसकी याद हर पल बढ़ती जा रही थी।

तस्वीर सौजन्य : राज पांडेय / क्यूग्राफ़ी

मैंने सोचा उसे जवाब दूँगा तो ठीक रहेगा। जान बूझ कर अगले दिन उसकी गाड़ी के पास गया और उसकी तरफ देख कर फ़ोन पर बात करने लगा उसे जलाने के लिए। मुझे देख कर उसने इशारे से पूछा कहाँ था अब तक? मैंने कोई जवाब नहीं दिया। वह बार-बार मुझसे आने के लिए बोलने लगा, पर मैं नहीं गया, और उसकी तरफ दूर से देखता रहा। अंत में बार-बार पूछ कर वो चला गया, मेरी तरफ देखते हुए। दिल टूट गया था उसका, शायद मैं रात भर सो नहीं पाया। अगले दिन उसके टाइम पर मैं जान बूझकर गया। उसे इग्नोर किया मैंने, और वह भी पीछे मुड़ कर मुझे देख रहा था। अंत में मुझसे रहा नहीं गया। मैं चुप चाप जाकर उसके पास बैठ गया। देखते ही वो मुझपे चिल्लाने लगा, की मेरे बुलाने पे भी क्यों नहीं आया? मैं भी चिल्ला पड़ा, ऐसे ही काफी देर तक लड़ने के बाद सारी भड़ास एक दूसरे के ऊपर निकाल दी हमने। बाद में मैं उठ कर जाने लगा तो उसने फिर से पहली वाली नज़र से देखा मुझे, मैंने इग्नोर किया। पर मेरा मन भी उसी में था। बहुत अफ़सोस हुआ अपनी उस हरकत पर, और गुस्सा भी उसके ऊपर ही था बहुत। पर जाते-जाते मैंने उसे छुप कर अपनी आँखें पोंछते देखा, शायद अपने आँसू छुपा गया मुझसे वह। पर उसकी रोती आँखों में मुझे खोने का डर दिखाई दिया।

पहली नज़र और इस नज़र में बहुत फरक था उसकी। पता नहीं क्यों लेकिन मन बिलकुल शांत हो गया की अब खुद खुदा भी जुदा नहीं कर सकता हमें। मैं अपने रास्ते जाने लगा, दूर कहीं गाना सुनाई दे रहा था, ‘बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम।’

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