Gay Love

कविता: एक सिमटती हुई पहचान

मिल गई हमें सांवैधानिक सौगात, तीसरे दर्जे के रूप में, आखिर कब मिलेंगे बुनियादी अधिकार, भारतीय नागरिक के स्वरूप में?

समलैंगिक और समाज

ये आज़ादी तो बस नाम की जो सलाखो से बचाती है, पर समलैंगिको को तो घरो में कैद हर बार किया जाता है..

कहानी : मुझे कुछ कहना है…

हाँ... मैं गे हूँ, एक समलैंगिक... जिसको सिर्फ लड़कों मे दिलचस्पी है। मुझे पता है तुम्हें बहुत गुस्सा आएगा ये जानकर। तुम शायद कभी मुझे माफ नही करोगी।