कविता: प्यार लफ्ज़ो मे कहाँ


इश्क़ किया तुमने तो अब छोड़ के मत जाना, 
मुश्किल से दिल सम्भला इसको तोड़ के मत जाना।


साथ तुम्हारे शुरू किया है मैंने जो ये सफ़र,
बीच राह में रास्ते को तुम मोड़ के मत जाना।


लोग कहे एक लड़का होकर लड़का को मैं चाहूँ, 
देखो देकर धोका मुझको लोगो को मत हँसाना।

समलैंगिक ये इश्क़ हमारा मुश्क़िलो की बाते, 
लोगो के तानो का गुस्सा मुझको मत सुनाना।

छोड़ चला सब कुछ साथ तेरे नये सफ़र पे यारा, 
कि छोड़के मुझको तू कभी अकेला मत कर जाना।

जाने कितने दिल है दुखाये एक तुझे पाने को, 
तू भी तो ये वादा कर मेरा दिल मत दुखाना।

ये समाज ये दुनिया सारी कोशिश करेगी, 
पर तू न बिछड़ना मुझसे कभी वरना मैंने तो मर जाना।

ये कहते ये लोग अपन तो जिस्मो परचाही, 
समलैंगिक लव सच्चा है हमें दुनिया को है दिखाना।

जीतू बगर्ती
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