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अवध गर्वोत्सव २०१७

‘इलज़ाम अब हटा लो!’: पहला अवध गर्वोत्सव लखनऊ में बखूबी संपन्न

ये गर्वोत्सव था हमारी अस्मिता का, पहचान का। गर्वोत्सव था अपने देह के अधिकार का। गर्वोत्सव था अपने इश्क के इज़हार का, अपने होने के एहसास का।
पॉल- एक गाथा (१/८) | तस्वीर: फेबियन हार्टवेल |

“पॉल – एक गाथा” – श्रृंखलाबद्ध कहानी (भाग १/८)

यह एक वास्विक घटनाओ से प्रेरित परन्तु काल्पनिक कहानी है। तस्वीरें केवल प्रस्तुतीकरण हेतु हैं और उनमें दर्शाए गए लोगों का कथा से कोई संबंध नहीं है। प्रस्तुत है कथा का पहला भाग: रोज की तरह आज भी सुबह-सुबह अस्पताल पहुँचकर कपडे बदले और यूनिफार्म पहन क... Read More...
'जीने दो आज़ाद' - कविता | छाया: चैतन्य चापेकर | सौजन्य: क्यूग्राफी

‘जीने दो आजाद’ (कविता)

ढाला गया हूँ उसी सेजिस मिट्टी से वजूद है तुम्हारालाल खून हमाराऔर लाल ही तुम्हारा चाहता हूँ प्यार पानातुम भी तो चाहते होहै जीने की ख्वाहिशदोनों में यकसाँफिर क्यों अंधेरा ?फिर क्यों अंधेरा ? सदियां गुजर चुकी हैं तारीकियों में रहकर अब न पंख मेरे काटो... Read More...
'इस रात की सुबह है' - अविनाश | छाया: राज पाण्डेय | सौजन्य: क्यूग्राफी |

इस रात की सुबह है: अविनाश

हमारे 'इस रात की सुबह है' इस मज़मून के अंतर्गत, लेखिका अपूर्वा कटपटल ने नागपूर के २३ वर्षीय अविनाश की आपबीती को अनुलेखित किया है: कहते है हर इंन्सान में कुछ ऩ कुछ अलग होता है। किसी को खुबसुरत चेहरा, तो किसी को आकर्षक शरीर इत्यादि कुदरत देती है। हम उस... Read More...
'नर्म हाथ' - एक लघुकथा | तस्वीर: ग्लेन हेडन

नर्म हाथ (एक लघुकथा)

इतने सालो में सब बदल गया होगा: उसकी हँसी, उसकी बातें, सब बदल गया होगा। अब वो मिले तो शायद मुझे नए सिरे से अपनी तलाश शुरू करनी होगी... कि 'वो है... या नहीं ?'।
कहानी: 'वह थोडा अलग था' | तस्वीर: कार्तिक शर्मा | सौजन्य: क्यूग्राफी

‘वह थोडा अलग था’: एक कहानी (भाग ३/३)

श्रुंखलाबद्ध कहानी 'वह थोड़ा अलग था' की पहली और दूसरी कड़ी पढ़ें। प्रस्तुत है कहानी की तीसरी और आखरी किश्त: मैंने बात को न बताने के लिहाज से बात बदली, ‘‘अरे यार छोडो अब, जो उसने किया वो मैं तुम्हें बता भी नही सकता।” मानसी इठती हुयी बोली, ‘‘अरे अब बता ... Read More...
तस्वीर: अविक राय | सौजन्य: क्यूग्राफी

‘वह थोडा अलग था’: एक कहानी (भाग २/३)

कहानी 'वह थोडा अलग था' का पहला भाग यहाँ पढ़ें। प्रस्तुत है भाग २: नौवीं की पढाई पूरी हुयी तो हम लोग दसवीं में आ गये। मोहन और मानसी अब भी मेरे साथ ही पढते थे। जुलाई अगस्त का महीना गर्मी और बरसात से मिला-जुला था। मैं अपने घर की छत पर सोता था। एक दिन मो... Read More...
तस्वीर सौजन्य: QGraphy

‘वह थोडा अलग था’: एक कहानी (भाग १/३)

प्रस्तुत है लेखक धर्मेन्द्र राजमङ्गल की मार्मिक कथा 'वह थोडा अलग था' की पहली कडी: उस समय की बात है जब मैं नौवीं क्लास में पढता था। मेरे दोस्तों की संख्या बहुत कम थी। क्लास में कुल मिलाकर छत्तीस लडके-लडकियां पढते थे, लेकिन मेरे लिये दो लोग ही मेरी पू... Read More...
तस्वीर: अर्णब नंदी; सौजन्य: QGraphy

“इस रात की सुबह है”: आकाश की कहानी

"इस रात की सुबह है", इस श्रुंखला के अंतर्गत हम आपको हमारे वाचकों द्वारा भेजे गए आत्मकथन प्रस्तुत करते हैं। भारत के लैंगिकता और जिन्सी अल्पसंखकों की  कहानियों में हम उनके संघर्ष के बारे में; भेदभाव के बावजूद सम्मान के साथ जीने में सफल होने के बारे में... Read More...
"आधा इश्क़": भाग १०/१०; तस्वीर: निखिल लोंढे, सौजन्य: QGraphy

‘आधा इश्क़’ – एक कहानी (भाग १०/१०)

शृंखलाबद्ध कहानी 'आधा इश्क' की पहली नौ किश्तें यहाँ पढ़ें: भाग १| भाग २  | भाग ३ | भाग ४ | भाग ५ | भाग ६ | भाग ७ | भाग ८ | भाग ९| प्रस्तुत है इस कथा का  दसवां और आखरी भाग: नीरज की डायरी: ~~~~~~~~~~~~ “सन्दीप, अब जब मम्मी ने बताया कि तुम उन्हें ... Read More...
"आधा इश्क": भाग ९/१०; तस्वीर सौजन्य: QGraphy

‘आधा इश्क़’ – एक कहानी (भाग ९/१०)

शृंखलाबद्ध कहानी 'आधा इश्क' की पहली आठ किश्तें यहाँ पढ़ें: भाग १| भाग २  | भाग ३ | भाग ४ | भाग ५ | भाग ६ | भाग ७ | भाग ८ |  प्रस्तुत है इस कथा का  नौवां भाग:  रिज़ल्ट का दिन: “ओये, तेरे कित्ते आये?” राकेश ने मनोज से पूछा। “यार फर्स्ट क्लास ही ... Read More...

दिल्ली क्वीयर प्राइड 2016

दिल्ली क्वीयर प्राइड समिति एक स्वैछिक समूह है जो सामुदायिक लागत से दिल्ली क्वीयर प्राइड और उस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता है। दिल्ली क्वीयर प्राइड क्वीयर समुदाय और उसके समर्थकों को साथ लाती है।