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'आधा इश्क': छाया: बृजेश सुकुमारन

‘आधा इश्क़’ – एक कहानी (भाग २/१०)

कहानी ‘आधा इश्क’ के पहले के हिस्से यहाँ पढ़ें: भाग १ प्रस्तुत है भाग २/१०:  -------------------------------- तीन साल पहले: “अरे यार, यह बस क्यों नहीं आ रही है, आज कॉलेज का पहला दिन है। आज ही लेट हो गए न, तो गालियाँ खानी पड़ेंगी सर की।” राकेश बस का... Read More...
'कल रात' - एक कविता , छाया: आकाश मंडल, सौजन्य: QGraphy

‘कल रात’ (एक कविता)

वह थी हकीक़त या ख़्वाब जो देखा था कल रात को सुबह उठकर न भूली मैं तो उस बीती बात को सदियों से जैसे बिछड़े वैसे हम दोनों मिले थे और गुज़ारे चाँद लम्हें जैसे वह आखरी मुलाक़ात हो तड्पी मेरी रूह, मेरा जिस्म बस तेरे अहसास को तरसती है जैसे सूखी ज़मीं प... Read More...
'आधा इश्क' भाग १/१०. तस्वीर: बिनीत पटेल. सौजन्य: QGraphy

‘आधा इश्क़’ – एक कहानी (भाग १/१०)

प्रस्तुत है, अंकुश द्वारा रचित कहानी "आधा इश्क" की पहली कड़ी: “ये क्या है यार, कबसे फोन लगा रही हूं। कितना सोएगा? उठ जा, आज शुक्रवार है, शनिवार नहीं। दफ्तर नहीं जाना क्या?" सुबह के ८ बजे थे और संदीप अभी तक सो रहा था। पूनम संदीप को कॉल करके उठाने की ... Read More...
लेखक भूषण कोरगावकर

लावणी के ठाठ, ‘सम्मति’ का पाठ: एक मुलाक़ात, भूषण कोरगावकर के साथ!

लावणी महाराष्ट्र की प्रसिद्द गान और नृत्य कला है| धर्म, राजनीति, मुहब्बत और समाज जैसे संवेदनशील विषयों पर, दोहरे अर्थ के शब्दों से कई बार लैस, लावणी एक कामुक, शृंगारिक कला प्रकार है जो मनोरंजन के माध्यम से अपना सन्देश प्रेक्षकों तक बखूबी पहुंचाता है।
किताब का मुख्यपृष्ठ

‘अपनाओ, नकारो या बदलो? ‘समलैंगिक पुरुषों के आपसी रिश्ते’

"समलैंगिक पुरुषों के आपसी रिश्ते, समस्त जीवन-काल के दौरान" यह पीटर रॉबिंसन द्वारा लिखी गई किताब  २०१३ में प्रकाशित हुई। मुंबई सहित दुनिया के ९ बड़े शहरों के ९७ गे पुरुषों से मुलाक़ात के ज़रिए जानी गई उनकी जीवन कहानियों का यह विश्लेषण है। परंपरागत विषमलै... Read More...

“अलीगढ़”: विलक्षण और साहसी

श्रीणिवास रामचन्द्र सिरास अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मराठी के प्राध्यापक, और आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष थे। "अलीगढ़" (हिंदी, २६ फरवरी २०१६ को प्रदर्शित) फिल्म की कहानी ८ फरवरी २०१० की ठंडी और धूमिल रात से शुरू होती है, जब वे हाथ-रिक्शा म... Read More...
सागर और राजेश - एक कहानी

‘सागर और राजेश’ – एक कहानी (भाग २/२)

इस कहानी का पहला भाग आप यहाँ पढ़ें । दूसरा और आखरी भाग: अपना दूसरा हाथ, सागर ने रिक्शावाले के कंधे पर रखा । रिक्शावाले के कंधे भालू जैसे बड़े और बोझल थे । सागर की छुअन पर वह कंधा स्पर्श की उमँग में तना और थोडा उभियाया । कुछ ही पलों में कंधे की उमेठन ... Read More...
संघर्ष: धीमा, मगर निरंतर

(३७७ के) ‘गमन’ की आशा! (संपादकीय)

संघर्ष: धीमा, मगर निरंतर ! तस्वीर: चैतन्य चापेकर; सौजन्य: QGraphy २ फरवरी २०१६ को भारतीय उच्चतम न्यायलय ने नाज़ फ़ौंडेशन व अन्य प्रार्थाकों द्वारा पेश की गई उपचारात्मक याचिका (क्युरेटिव पेटीशन) को ५ न्यायाधीशों के संवैधानिक पीठ (बेंच) के सामने प्रस्त... Read More...
"जब मैं बुर्का पहनकर..."

जब मैं बुर्क़ा पहनकर…

'स्क्रिप्ट्स', नं १५, दिसंबर २०१५ में प्रथम प्रकाशित। छाया: ब्रूनो गताँ /क्वीयर आजादी २००९ /तस्वीर केवल निरूपण हेतु "जब मैं बुर्का पहनकर..." … हॉल में दाख़िल हो रही थी, वहाँ मौजूद सभी लोगों की निगाहें मुझ पर जमी थीं। शायद वे यह सोचते होंगे कि ये ... Read More...
अमित कुमार, छाया सौजन्य: wrestlingisbest.tumblr.com

खेल फौलादी

पहला भारतीय प्रो कुश्ती लीग इस सप्ताह शुरू हुआ। १० से २७ दिसंबर २०१५ के बीच चलने वाली इस स्पर्धा का सीधा प्रसारण टीवी के सोनी 'मैक्स', 'सिक्स' और 'पल' चैनलों पर ६० देशों में भारत के शाम के सात बजे होगा। ५४ कुश्ती पहलवान ६ टीमों का प्रतिनिधित्व कर रहे... Read More...
'सन्नाटा' - एक कविता; छाया: कार्तिक शर्मा

सन्नाटा – एक कविता

सन्नाटा दिल के तख़्त पर महफूज़ रखा था मेरी हर नन्हीं सी ख्वाहिश को मेरे छोटे से इन हाथों में दिया तुमने जग यह सारा हर क़दम चला तेरे साए में तेरे आँचल में मैं सोया भी जाने कैसे छूटी वह डोर कैसे तुझको मैं हारा कोशिश अब रोज़ यह है मेरी तेरे जग में... Read More...
किन्नर अखाडा: तथा ध्वजारोहण

किन्नर अखाड़े का गठन

किन्नर अखाड़ा ट्रांसजेण्डर समुदाय की धार्मिक स्वीकार्यता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। भारत की एक प्रमुख ट्रांसजेण्डर अधिकार कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी तथा उज्जैन स्थितअशोक वाटिका आश्रम के संचालक अजय दास जी महाराज के सहयोग से कि... Read More...