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सोच रहा था तनहा
क्या था मुझ में कुछ अनोखा?
क्या कुदरत ने ऐसा मुझे बनाया?
या इस समाज ने जताया?

जब सब ने मुझे ठुकराया,
तब मैंने खुद को अपनाया।
प्रीतम होकर मैंने,
प्रीतम संग प्रेम निभाया।

पर ना जाने क्यों दुनिया को,
हमारा प्रेम नहीं समझ में आया।
जब दुनिया ने मुझे मुझसे भरमाया,
तब मैंने अपना ‘वजूद’ अपनाया।

रितिक चक्रवर्ती (Ritwik Chakravarty)

रितिक चक्रवर्ती लखनऊ के रहने वाले हैं और पिछले 4 सालों से एलजीबीटी समाज के मुद्दों पर काम कर रहें हैं l लखनऊ के अवध क्वीर कम्युनिटी के साथ सुचारू रूप से काम करते हुए मुख्यधारा के लोगों को एलजीबीटी मुद्दों पे अपने कविता लेखों के माध्यम से जागरूक करते रहते हैं l इसी के साथ वे माइथॉलजिस्ट की भूमिका में भारतीय अध्यात्म संस्कृति में क्वीर समुदाय की पहचान को प्रकाशित करते हैं l
रितिक चक्रवर्ती (Ritwik Chakravarty)

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